Thursday, 16 July 2026

शायरी 001

शायरी 001

 :1:

मैं चुप रहा तो मुझे मार देगा मेरा जमीर

गवाही दी तो अदालत में मारा जाऊँगा ।

-राणा सईद दोशी-

:2:

मैं मयकदे की राह से होकर निकल गया

वरना सफ़र हयात का काफी तवील था ।

अब्दुल हमीद ’अदम’

:3:

ये आईना है सदाक़त बयान करता है

कि इसके आगे अदाकारियाँ नहीं चलती

--मंज़र भोपाली-

:4: 

अजीब बात है वो एक-सी ख़ताओं पर

किसी को क़ैद किसी को रिहाई देता है ।

-मंज़ूर हाशमी--

;5:

जफ़ा के ज़िक्र पर तुम क्यों सँभल के बैठ गए

तुम्हारी बात नहीं, बात है ज़माने की ।

-मजरूह सुल्तानपुरी-

:6:

गो, ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए

लेकिन इतना तो हुआ, कूछ लोग पहचाने गए।

-ख़ातिर ग़ज़नवी-

;7:

ऎ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है ,

वही होता है जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता  है ।

-मिर्ज़ा रज़ा बर्क़- 

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प्रस्तुतकर्ता
आनन्द पाठक ’आनन’

8800927181

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