शायरी 001
:1:
मैं चुप रहा तो मुझे मार देगा मेरा जमीर
गवाही दी तो अदालत में मारा जाऊँगा ।
-राणा सईद दोशी-
:2:
मैं मयकदे की राह से होकर निकल गया
वरना सफ़र हयात का काफी तवील था ।
अब्दुल हमीद ’अदम’
:3:
ये आईना है सदाक़त बयान करता है
कि इसके आगे अदाकारियाँ नहीं चलती
--मंज़र भोपाली-
:4:
अजीब बात है वो एक-सी ख़ताओं पर
किसी को क़ैद किसी को रिहाई देता है ।
-मंज़ूर हाशमी--
;5:
जफ़ा के ज़िक्र पर तुम क्यों सँभल के बैठ गए
तुम्हारी बात नहीं, बात है ज़माने की ।
-मजरूह सुल्तानपुरी-
:6:
गो, ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए
लेकिन इतना तो हुआ, कूछ लोग पहचाने गए।
-ख़ातिर ग़ज़नवी-
;7:
ऎ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है ,
वही होता है जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है ।
-मिर्ज़ा रज़ा बर्क़-
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प्रस्तुतकर्ता
आनन्द पाठक ’आनन’
8800927181
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