शायरी 013
अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो
और यह भी देखते हैं कि कोई देखता न हो।
-निज़ाम रामपुरी-
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फितरत को नापसंद है सख़्ती बयान में
पैदा हुई न इसलिए हड्डी ज़बान में ।
-हबीब लखनवी-
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शायरी 013 अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो और यह भी देखते हैं कि कोई देखता न हो। -निज़ाम रामपुरी- --- फितरत को नापसंद है सख़्ती बयान में पैद...
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