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शायरी 016
शे’र-0-शायरी 016 इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे । -हबीब जालिब- ----- अजीब सोच है इस शहर के मकीनों ...
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चर्चा 002 : मफ़ऊलात्-मफ़ऊलातु जो शायरी में अरूज़, वज़न बहर अर्कान से वाक़िफ़ होंगे, वह इस रुक्न से अवश्य परिचित होंगे। जी हाँ यह सालिम एक रुक्न ...
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किस्सा 002: अंधे को अँधेरे में बड़ी दूर की सूझी-- यह मिसरा बातचीत के क्रम में [दौरान-ए-गुफ़्तगू] कभी न कभी आप ने ज़रूर सुना होगा जब कोई आदमी ...
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चर्चा 003 : सालिम रुक्न मफ़ऊलातु पर--[क्रमांक से आगे] पिछले चर्चा 002] में एक सालिम रुक्न -मफ़ऊलातु- पर चर्चा किया था जिसमें कहा था कि यह ए...
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