शे’र-0-शायरी 016
इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे
ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे ।
-हबीब जालिब-
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अजीब सोच है इस शहर के मकीनों का
मकाँ नए हैं, मगर खिड़कियाँ पुरानी हैं ।
-सैयद सिब्ते अली ’सबा’-
बाक़ी अश’आर यहां सुनें--
शे’र-0-शायरी 016
इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे
ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे ।
-हबीब जालिब-
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अजीब सोच है इस शहर के मकीनों का
मकाँ नए हैं, मगर खिड़कियाँ पुरानी हैं ।
-सैयद सिब्ते अली ’सबा’-
बाक़ी अश’आर यहां सुनें--
शायरी 014
मशहूर शायरों के चुनिंदा शे’र---
तमाम उम्र इसी एहतितात में गुज़री
कि आशियाँ किसी शाखे-चमन पे बार न हो।
-महशर-
हमने तो यूँ ही राख में फेरी थी उगलियाँ
देखा जो ग़ौर से तेरी तसवीर बन गई ।
-सलीम बेताब-
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बाक़ी अश’आर आप यहां सुन सकते है_---
https://youtu.be/PouoGpy9K-0
प्रस्तुतकर्ता
-आनन्द.पाठक ’आनन’-
शे’र-0-शायरी 016 इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे । -हबीब जालिब- ----- अजीब सोच है इस शहर के मकीनों ...