Friday, 11 September 2026

शायरी 016

शे’र-0-शायरी 016


इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे

ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे ।

-हबीब जालिब-

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अजीब सोच है इस शहर के मकीनों का

मकाँ नए हैं, मगर खिड़कियाँ  पुरानी हैं ।

-सैयद सिब्ते अली ’सबा’-



बाक़ी अश’आर यहां सुनें--


 




Sunday, 6 September 2026

शायरी 015:

्शायरी 015   : कुछ चुनिंदा शायरों  के मशहूर शे’र


बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मेरे
जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे।-
-साकिब लखनवी-
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रहे दो दो फ़रिश्ते साथ, अब इन्साफ़ क्या होगा
किसी ने कुछ लिखा होगा, किसी ने कुछ लिखा होगा। 
-हरीचन्द अख़्तर-


ऐसे ही अन्य अश’आर यहाँ सुने---

शाय्र

 

Tuesday, 1 September 2026

शायरी 014

 शायरी 014


मशहूर शायरों के चुनिंदा शे’र---

तमाम उम्र इसी एहतितात में गुज़री

कि आशियाँ किसी शाखे-चमन पे बार न हो।  

-महशर-


हमने तो यूँ ही राख में फेरी थी उगलियाँ

देखा जो ग़ौर से तेरी  तसवीर बन गई ।

-सलीम बेताब-

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बाक़ी अश’आर आप यहां सुन सकते है_---

https://youtu.be/PouoGpy9K-0


प्रस्तुतकर्ता

-आनन्द.पाठक ’आनन’-

शायरी 016

शे’र-0-शायरी 016 इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे । -हबीब जालिब- ----- अजीब सोच है इस शहर के मकीनों ...