बुधवार, 19 अगस्त 2026

शायरी 012

 शायरी 012

दिल के आईने में है तस्वीर-ए-यार
जब ज़रा गरदन झुकाई  देख ली ।

मुंशी मौजी राम ’मौजी-

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ये कह दो जा के वाइज़ से, अगर समझाने आए हैं
कि हम दैर-ओ-हरम से हो के फिर मयखाने आए हैं।


कृशन चन्दर ’हैरत गोण्डवी-


बाक़ी अश’आर यहाँ सुनें--



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