शायरी 012
दिल के आईने में है तस्वीर-ए-यार
जब ज़रा गरदन झुकाई देख ली ।
मुंशी मौजी राम ’मौजी-
-----
ये कह दो जा के वाइज़ से, अगर समझाने आए हैं
कि हम दैर-ओ-हरम से हो के फिर मयखाने आए हैं।
कृशन चन्दर ’हैरत गोण्डवी-
बाक़ी अश’आर यहाँ सुनें--
No comments:
Post a Comment