सोमवार, 10 अगस्त 2026

शायरी 011

 शायरी 011
:1: 

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी
लोग बेवज़ह उदासी का सबब पूछेंगे ।
- कफ़ील अहमद ’कफ़ील’-

:2:
मैं घर में भी उससे मिलती कैसे
दीवार खड़ी थी घर के अंदर ।
किश्वर नाहीद [ शायरा]

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