शायरी 011
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बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी
लोग बेवज़ह उदासी का सबब पूछेंगे ।
- कफ़ील अहमद ’कफ़ील’-
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मैं घर में भी उससे मिलती कैसे
दीवार खड़ी थी घर के अंदर ।
किश्वर नाहीद [ शायरा]
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