शायरी 009
बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का
जो चीरा तो इक क़तरा-ए-खूँ न निकला।
-हैदर अली ’आतिश’-
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ये चमन यूँ ही रहेगा और हज़ारो जानवर
अपनी अपनी बोलियाँ सब बोल कर उड़ जाएँगे।
-बहादुर शाह ज़फ़र-
ऐसे ही अन्य मशहूर अश’आर यहाँ सुनें---
शायरी 013 अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो और यह भी देखते हैं कि कोई देखता न हो। -निज़ाम रामपुरी- --- फितरत को नापसंद है सख़्ती बयान में पैद...
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