Friday, 31 July 2026

शायरी 009

शायरी 009

बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का

जो चीरा तो इक क़तरा-ए-खूँ न निकला।

-हैदर अली ’आतिश’-

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ये चमन यूँ ही रहेगा और हज़ारो जानवर

अपनी अपनी बोलियाँ सब बोल कर उड़ जाएँगे।

-बहादुर शाह ज़फ़र-

ऐसे ही अन्य मशहूर अश’आर यहाँ सुनें---


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