Saturday, 1 August 2026

शायरी 009

शायरी 009

बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का

जो चीरा तो इक क़तरा-ए-खूँ न निकला।

-हैदर अली ’आतिश’-

----

ये चमन यूँ ही रहेगा और हज़ारो जानवर

अपनी अपनी बोलियाँ सब बोल कर उड़ जाएँगे।

-बहादुर शाह ज़फ़र-

ऐसे ही अन्य मशहूर अश’आर यहाँ सुनें---


No comments:

Post a Comment

शायरी 016

शे’र-0-शायरी 016 इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे । -हबीब जालिब- ----- अजीब सोच है इस शहर के मकीनों ...