शायरी 009
बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का
जो चीरा तो इक क़तरा-ए-खूँ न निकला।
-हैदर अली ’आतिश’-
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ये चमन यूँ ही रहेगा और हज़ारो जानवर
अपनी अपनी बोलियाँ सब बोल कर उड़ जाएँगे।
-बहादुर शाह ज़फ़र-
ऐसे ही अन्य मशहूर अश’आर यहाँ सुनें---
शे’र-0-शायरी 016 इस शह्रे-खराबी में ग़मे-इश्क़ के मारे ज़िंदा हैं, यही बात बड़ी बात है प्यारे । -हबीब जालिब- ----- अजीब सोच है इस शहर के मकीनों ...
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