शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

शायरी 020

 शे’र-0-शायरी 020

अब्रू न सँवारा करो, कट जाएगी उँगली
नादान हो तलवार से खेला नहीं  करते ।  
  
-आग़ा जफ़र बेग क़जलबाश-

[अब्रू = भौहें]

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दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की
यारों ने मेरे सहन में रस्ते बना लिए ।

-सिब्ते अली ’सबा’-




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