शे’र-0-शायरी 020
अब्रू न सँवारा करो, कट जाएगी उँगली
नादान हो तलवार से खेला नहीं करते ।
नादान हो तलवार से खेला नहीं करते ।
-आग़ा जफ़र बेग क़जलबाश-
[अब्रू = भौहें]
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दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की
यारों ने मेरे सहन में रस्ते बना लिए ।
-सिब्ते अली ’सबा’-
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