Monday, 27 July 2026

शायरी 007:

 शायरी 007


जो निक़ाबे-रुख़ उठा दी तो ये क़ैद भी लगा दी

उठे हर निगाह लेकिन कोई बाम तक न पहुँचे ।

-शकील बदायूनी-

[बाम तक = छत तक]

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निकल कर दैरो-काबा’ से अगर मिलता न मयख़ाना

तो ठुकराए हुए इंसाँ खुदा जाने कहाँ जाते ।

-क़तील शिफ़ाई-


ऐसे ही और चन्द मशहूर और मक़्बूल अश’आर यहाँ सुनें


प्रस्तुतकर्ता
आनन्द.पाठक’आनन’-

880092 7181

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