क़िस्त 010: शायरी 006
जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं
न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है ।
-सुरेश चन्द्र ’शौक़’
[इक्तिदार = हुकूमत]
सभ्यता के पंथ पर यह आदमी की यात्रा
देवताओं से शुरु की, वहशियों तक आ गए ।
-चन्द्रसेन विराट-
ऐसे ही लोकप्रिय मक़्बूल अश’आर जो हर आम-0-ख़ास के ज़ुबानजद है
यहाँ सुनें--
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