Sunday, 19 July 2026

क़िस्त 010: शायरी 006

क़िस्त 010: शायरी 006 


जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं

न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है ।

-सुरेश चन्द्र ’शौक़’

[इक्तिदार = हुकूमत]


सभ्यता के पंथ पर यह आदमी की यात्रा

देवताओं से शुरु की, वहशियों तक आ गए ।

-चन्द्रसेन विराट-

ऐसे ही लोकप्रिय मक़्बूल  अश’आर  जो हर आम-0-ख़ास के ज़ुबानजद  है 
यहाँ सुनें--


No comments:

Post a Comment

क़िस्त 010: शायरी 006

क़िस्त 010: शायरी 006  जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है । -सुरेश चन्द्र ’शौक़’ [इक्तिदार = हुकूम...