्शायरी 015 : कुछ चुनिंदा शायरों के मशहूर शे’र
बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मेरे
जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे।-
-साकिब लखनवी-
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रहे दो दो फ़रिश्ते साथ, अब इन्साफ़ क्या होगा
किसी ने कुछ लिखा होगा, किसी ने कुछ लिखा होगा।
-हरीचन्द अख़्तर-
ऐसे ही अन्य अश’आर यहाँ सुने---
शाय्र
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