Sunday, 6 September 2026

शायरी 015:

्शायरी 015   : कुछ चुनिंदा शायरों  के मशहूर शे’र


बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मेरे
जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे।-
-साकिब लखनवी-
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रहे दो दो फ़रिश्ते साथ, अब इन्साफ़ क्या होगा
किसी ने कुछ लिखा होगा, किसी ने कुछ लिखा होगा। 
-हरीचन्द अख़्तर-


ऐसे ही अन्य अश’आर यहाँ सुने---

शाय्र

 

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