शायरी 019
नरम अल्फ़ाज़ भी चुभ जाते हैं नश्तर की तरह
चोट फूलों से भी लग जाती है पत्थर की तरह -
-ताहिर तिलहरी-
एक पत्थर की भी तक़दीर संवर सकती है,
शर्त ये है कि सलीक़े से सँवारा जाए ।
-मंज़ूर नदीम जालापुरी-
बाक़ी अश’आर यहाँ सुनें__
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