सोमवार, 28 सितंबर 2026

शायरी 019

 शायरी 019 


नरम अल्फ़ाज़ भी चुभ जाते हैं नश्तर की तरह

चोट फूलों से भी लग जाती  है पत्थर की तरह  -

-ताहिर तिलहरी-


एक पत्थर की भी तक़दीर संवर सकती है,

शर्त ये है कि सलीक़े से सँवारा  जाए ।      

-मंज़ूर नदीम जालापुरी-

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